
ॐ जय श्री श्याम हरे, प्रभु जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अविनाशी अवतारे।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
शरणागत के स्वामी, संकट हरने वाले।
जग में नाम तुम्हारा, है सब दुःख हरने वाले।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
बाल स्वरूप निराले, सिर पर चन्द्र शोभित।
शरण में जो आये, प्रभु सब दुःख उसके रोहित।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
तीन तीरधारी प्रभु, शीशदान की गाथा।
सुखी करे संसार को, ऐसी तेरी परछाईं।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
भक्त मनोकामनाएँ, पूरी करते हो प्रभु।
दरबार में जिसके, कभी नहीं कोई दुखी।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
खाटू के धाम में, बजे दीनन की बानी।
जो भी दर पे आये, उसकी लग जाए पानी।।
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
आरती श्री श्याम की, जो जन नित्य गावे।
श्याम प्रेमरस पाकर, वह सुख संपदा पावे।।
rabindranathtagore.space , apjabdulkalam.online , jawaharlalnehru.online , chandrashekharazad.online , subhaschandrabose.space